बांसुरी की धुन: जन्माष्टमी का जश्न ये पुस्तक श्री कृष्ण के मधुर रूप और वृंदावन की लीला को समर्पित है। पन्नों में बांसुरी की मीठी तान के साथ भक्ति, प्रेम और उत्सव का रंग घुला है। माखन-मिश्री, झूला, मटकी फोड़ और गोपियों के रास का जीवंत वर्णन है। हर पेज पर जन्माष्टमी की खुशबू और कृष्ण-भक्ति का आनंद मिलता है। ये किताब बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके दिल में कान्हा के प्रति प्रेम जगा देती है। मटकी फूटी, बांसुरी बजी, नंद घर आनंद छाया आज कन्हैया आया है, हर दिल में कृष्ण समाया माखन की खुशबू, मोर मुकुट की छाया कान्हा के जन्मदिन पर, ब्रज में आनंद का उत्सव छाया


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