पद्यांजलि केवल कागज़ पर उकेरे गए अक्षर नहीं, अपितु मेरे अंतर्मन की गहराइयों से उपजे २५१ विविध भावों का दिव्य समर्पण है। ये मेरे जीवन की तपस्या से निकले विचार, दर्शन और अनुभूतियाँ हैं।आपने अनगिनत कविताओं में स्नान किया होगा, पर क्या कभी एक ही कृति में, २५१ अलग-अलग विषयों से सजे भावनाओं के इस अद्भुत ‘महाकुंभ’ का दर्शन किया है?मेरा प्रत्येक छंद एक विशिष्ट प्रेरणा और गहरे उद्देश्य से सिंचित है। मैंने शब्दों को इस तरह तराशा है कि वे सीधे आपके हृदय के तार को छू सकें और जीवन-संदेश बिना किसी रुकावट के आपकी आत्मा तक पहुँच जाए।


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